उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जहां एक बहू के किए की कीमत उसके ससुर को चुकानी पड़ी. दरअसल, एक महिला ने सड़क पर कूड़ा फेंक दिया. इस बात से नाराज होकर कुछ लोगों ने उस महिला के बुजुर्ग ससुर की लाठी डंडों से पिटाई कर दी. जिस कारण बुजुर्ग ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.
मामला शाहजहांपुर जिले के मदनापुर थाना क्षेत्र का है. जहां एक गांव में दलित समुदाय का 60 वर्षीय सीताराम अपने परिवार के साथ रहता था. रविवार को सीताराम की बहू झुमका ने घर बाहर मुख्य सड़क पर कूड़ा फेंक दिया. इल्जाम है कि इस बात नाराज होकर गांव के कुछ लोग महिला के घर पहुंच गए और वहां मौजूद उसके बुजुर्ग ससुर सीताराम की लाठी डंडों से पिटाई कर दी.
बुजुर्ग सीताराम घायल होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े. आरोपी मौके से फरार हो गए. परिजन बुजुर्ग को लेकर फौरन अस्पताल पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद सीताराम को मृत घोषित कर दिया. परिवार ने इस संबंध में पुलिस को शिकायत की. पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ आईपीसी की हत्या और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है.
पुलिस के अनुसार गांव में कूड़े को लेकर सीताराम का गांव के ही बीरबल, अंकित और विश्वनाथ यादव के साथ झगड़ा हुआ था. उस वक्त सीताराम के परिवार का एक सदस्य और वहां मौजूद था. लेकिन वह मौके से भाग गया. जबकि आरोपियों ने सीताराम को पिटाई की. जिससे उसकी मौत हो गई.
पुलिस मामले की छानबीन कर रही है. अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. घटना को लेकर दलित समुदाय के लोगों में रोष है.
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (ANI)
कुबूल अहमद\मोहित ग्रोवर
नई दिल्ली , 26 नवंबर 2018, अपडेटेड 12:23 IST
संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली के विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने संविधान के लागू होने की तारीख याद करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि सात दशकों में हमारा संविधान महान शक्ति के रूप में स्थापित हुआ.
उन्होंने कहा कि जब संविधान को लागू किया गया था, तो हमारे संविधान की आलोचना की गई थी. सर इवर जेनिंग्स ने इसे बहुत बड़ा और कठोर कहा था, लेकिन समय ने इस आलोचना को कमजोर साबित कर दिया. सात दशकों से हमारा संविधान महान शक्ति के रूप में बना हुआ है.
CJI बोले कि हमारा संविधान हमारा मार्गदर्शन करता है, मुश्किल के समय में भी संविधान ही रास्ता दिखाता है. हमारे हित में यही है कि हम संविधान की सलाह के अनुसार ही चलें. यह हमारे हित में है कि हम संविधान के दायरे में रहते हुए उपर्युक्त सलाह लें. यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.
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